ब्लड प्रेशर (बीपी) यानी खून का नसों की दीवारों पर पड़ने वाला दबाव। इसे दो नंबरों में मापा जाता है — सिस्टोलिक (ऊपर वाला) और डायस्टोलिक (नीचे वाला), जैसे 120/80 mmHg। उम्र, तनाव, खानपान और जीवनशैली के साथ बीपी घटता-बढ़ता है, इसलिए अपनी नॉर्मल रेंज जानना बहुत ज़रूरी है।
बीपी नॉर्मल रेंज चार्ट
| श्रेणी | सिस्टोलिक (ऊपर) | डायस्टोलिक (नीचे) |
| नॉर्मल | 120 से कम | 80 से कम |
| बॉर्डरलाइन (एलिवेटेड) | 120–129 | 80 से कम |
| हाई बीपी स्टेज 1 | 130–139 | 80–89 |
| हाई बीपी स्टेज 2 | 140 या ज़्यादा | 90 या ज़्यादा |
| लो बीपी | 90 से कम | 60 से कम |
हाई बीपी के लक्षण
- सिरदर्द, चक्कर आना और गर्दन में भारीपन
- सीने में धड़कन तेज़ होना या घबराहट
- आंखों के सामने धुंधलापन
- नाक से खून आना (कभी-कभी)
- अक्सर हाई बीपी के कोई लक्षण नहीं दिखते — इसीलिए इसे 'साइलेंट किलर' कहते हैं
लो बीपी के लक्षण
- चक्कर आना, आंखों के आगे अंधेरा छाना
- थकान, कमजोरी और ध्यान न लगना
- उठते-बैठते चक्कर (पोश्चुरल हाइपोटेंशन)
- ठंडे हाथ-पैर और पसीना आना
बीपी कंट्रोल करने के उपाय
- नमक कम खाएं — दिन भर में एक छोटा चम्मच से ज़्यादा नहीं।
- रोज़ 30 मिनट तेज़ चलना या हल्की एक्सरसाइज़ करें।
- वज़न कंट्रोल में रखें; मोटापा बीपी बढ़ाता है।
- धूम्रपान और शराब से दूर रहें।
- तनाव कम करें — गहरी सांस, योग और पूरी नींद लें।
- हरी सब्ज़ियां, फल, दालें खाएं; तला-भुना और पैकेज्ड फूड कम करें।
- डॉक्टर की बताई दवा समय पर लें, खुद बंद न करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सामान्य बीपी कितना होना चाहिए?
आम तौर पर 120/80 mmHg से कम को नॉर्मल माना जाता है। उम्र और सेहत के हिसाब से थोड़ा अंतर हो सकता है।
बीपी कब नापना चाहिए?
सुबह उठने के बाद, आराम की स्थिति में, चाय-कॉफी से पहले नापना सबसे सही रहता है।
क्या टेंशन से बीपी बढ़ता है?
हां, तनाव से बीपी अस्थायी रूप से बढ़ सकता है। लगातार तनाव हाई बीपी का खतरा बढ़ाता है।
लो बीपी में क्या खाएं?
पर्याप्त पानी, नमक वाला छाछ या नींबू-पानी, और समय पर भोजन लो बीपी में मदद करते हैं।
क्या बीपी की दवा जीवनभर खानी पड़ती है?
यह डॉक्टर तय करते हैं। कई बार जीवनशैली सुधारने पर दवा की ज़रूरत कम हो सकती है, पर दवा खुद बंद न करें।
Disclaimer: यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है, चिकित्सकीय सलाह नहीं। कोई भी इलाज, दवा या डाइट शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह ज़रूर लें।